फिल्म समीक्षा: आक्रोश
बिहार-झारखंड के ग्रामीण परिवेश में आज भी दिल्ली की सरकार के समानांतर एक और ही सरकार चलती है, इसमें सरकारी अफसर हैं, लेकिन वे सरकारी राज को मजबूत नहीं बनाते। दलित और सवर्ण परिवार के युवक-युवती के बीच पनपी प्रेम कथा में बाहुबली के साथ कंधे से कंधा मिलाए खड़े हैं सांसद, पुलिस अधीक्षक और कलक्टर समेत तमाम सरकारी अमला।
फिल्म में निर्देशक ने आक्रोश के जरिए इज्जत के नाम पर प्रेमियों की हत्या के संवेदनशील मुद्दे को तो उठाया ही है, साथ ही सही मायनों में इन इलाकों के हालतों को भी प्रदर्शित किया है। हेराफेरी, हंगामा और मालामाल वीकली जैसी सफल कॉमेडी फिल्मों की परम्परा को कायम रखने में विफल रहे प्रियदर्शन एक बार फिर अपने पुराने रंग में लौटे हैं, जिनमें विरासत और कांजीवरम जैसी फिल्मों का प्रभावी निर्देशन झलकता है। फिल्म की कहानी दिल्ली के मेडिकल कॉलेज से गायब हुए तीन छात्रों की है, जिनका दो महीने तक पता नहीं चलने पर सीबीआई को जांच दी जाती है। मेडिकल छात्रों की खोज के लिए आए सीबीआई अफसर सिद्धांत चतुर्वेदी (अक्षय खन्ना) और प्रताप (अजय देवगन) झांझर पहुंचते हैं, तो कोई जुबान खोलने को तैयार नहीं होता और वे जिससे भी बातचीत करना चाहते हैं, उसे बाहुबली और त्रिशूल सेना के गुंडे जीवित नहीं छोड़ते। अत्याचार के खिलाफ जब जनता एकजुट होती है तो उसे बाहुबली के गुंडों की आगजनी के साथ ही पुलिस के बर्बरतापूर्णलाठीचार्ज का सामना करना पड़ता है। खोजबीन में पता चलता है कि इस घटना के पीछे मेडिकल छात्र दीनू और बाहुबली ठाकुर की बेटी के बीच की प्रेमकथा है। तीनों मेडिकल छात्रों की हत्या का केस खुलता है तो बाहुबली ठाकुर, पुलिस अधीक्षक और सांसद कठघरे में होते हैं, जिन्हें सीबीआई अफसर सिद्धांत प्रोटोकॉल की सीमा में रहते हुए शूट करवा देता है।
पूरी फिल्म में अजय देवगन छाए रहे हैं और उनका अभिनय भी काबिलेतारीफ है। अक्षय खन्ना का अभिनय सहज है, बिपाशा मध्यांतर बाद ही फिल्म में दिखी हैं और उनका रोल छोटा है। परेश रावल दर्शकों की तारीफ बटोरने में कामयाब रहे हैं। प्रियदर्शन की कॉमेडी टीम यहां भी शामिल है, जिसने कॉमेडी से इतर यहां गंभीर रोल अदा किए हैं।
फिल्म में प्रियर्दशन का निर्देशन और अरुण कुमार की एडिटिंग उम्दा है। गीत संगीत बहुत रोचक नहीं बन पड़े हैं, आइटम सॉन्ग पसंद किया जा सकता है। कुलमिलाकर इसे प्रियदर्शन की एक बेहतर वापसी माना जा सकता है।
Saturday, 16 October 2010
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment