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Saturday, 30 January 2010

ये संस्कृति के पतन का साक्षी है

हर कोई खुद को अपने से अगली जमात में बिठाए जाने पर खुशी महसूस करता है, उसे ये खुशफहमी रहती है कि वो आगे की जमात में मौजूद लोगों के समकक्ष हो गया है और उसका वजूद भी कुछ हाई-फाई हो गया है। एक किताब लिखकर कोई कितना बड़ा लेखक या विद्वान हो सकता है, जवाब चाहिए तो सबसे पहले किसी भी शहर में होने वाले लिट्रेचर फेस्टिवल को आजमाएं। हालिया जयपुर में हुए पांच दिन लिट्रेचर फेस्टिवल में चार दिन जाने का मौका मिला, तो एक नई संस्कृति से रूबरू हुआ। साहित्य के इस उत्सव में ताजा जवां हुए कई लेखक इस बात से प्रफुल्लित थे कि वो अंग्रेजी उपन्यासकारों की गिनती में आ गए हैं और पूरा मीडिया उन्हें कवरेज दे रहा है। ये अंग्रेजी में लिखने वाले साहित्यकार भी अंग्रेजों के साथ बैठकर खुद को अगली जमात में गिनकर गर्व से सिर उठाए बोल रहे थे। मुझे हैरत तब हुई, जब एक लेखक महोदय, जिनका पहला उपन्यास अभी प्रकाशित ही हुआ है और बमुश्किल सौ प्रतियां बिकी होंगी, बड़े जोश के साथ 'कैसे बनें अच्छे आलोचकÓ पर व्याख्यान दे रहे थे। सुनने के लिए थे करीब दो दर्जन मीडियाकर्मी और पचासेक श्रोता। यूं हमारी मातृभाषा में कोई दर्जनभर से अधिक कृतियां लिख ले तो भी शायद ही उसे बोलने के लिए कोई मंच मिले। लेकिन अंग्रेजीदां के साहित्य महोत्सवों की बात ही कुछ और है।यूं तो यहां संस्कृति की बात करना ही बेमानी है, फिर भी आपको यहां लेखकों की मर्यादाएं देखनी हों तो दिखेंगे मंच पर शराब के पैग भरे लेखक, सिगरेट के कश लगाते हुए धुएं के छल्ले उड़ाती नवलेखिकाएं और कवियित्रीयां और अगर किसी कवियित्री के हाथ में आपको बियर का गिलास दिखे तो भी ताज्जुब की बात नहीं। इन्हीं लेखकों और लेखिकाओं के पहनावे पर आपकी नजर जाए तो आपको समझ आएगा कि बॉलीवुड और हॉलीवुड के सारे नए फैशन स्टाइल यहीं से प्रेरित होकर तैयार होते हैं। पचास वर्ष की कोई लेखिका अद्धनग्न अवस्था में स्कर्ट पहने आपके साथ भोजन की प्लेट पकड़ी दिखे तो आप कहेंगे भला यह भी फैशन की कोई उम्र है, लेकिन सही मायनों में फैशन इसी उम्र में इनपर फबता है (जैसी कि इनकी खुद की सोच है।) साहित्य महोत्सव की शाम कुछ और भी सुहानी हो जाती है, जब एक अंग्रेजी महिला बियर काउंटर से बोतल पाने के लिए बैरे को शुद्ध हिन्दी में 'भैयाजी एक बियर दे दोÓ कहते नहीं थकती, एक साहित्यकार खुले दिल से अपने फिल्मी दोस्त के गाल को चूमते हैं और स्टेज के नीचे अद्धबेहोशी में एक अंग्रेजी महिला अपने वस्त्रों की सुध-बुध खो बैठती है।