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Sunday, 4 May 2008

... और चाटुकारिता की इंतिहा

अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने भारतीयों के दोनों समय भोजन करने पर चिंता जहिर की है। उनका कहना है कि अब ३५ करोड हिन्दुस्तानी भरपेट खाते हैं। बुश के इस कथन पर हर भारतीय का रोष जताना लाजिमी है। लेकिन लाख टके का सवाल ये है कि अमरीका के हर कथन को मुशर्रफ के येस बॉस की तर्ज पर स्वीकार करने वालों के सामने कोंनसी मज़बूरी है ? महान कमलनाथ और शरद पवार दि ग्रेट के वक्तव्य से जहिर होता है कि कैबिनेट सेलेक्शन के दरमियानउन्होंने भारतीय संविधान के लिए नहीं, वरन अमरीका कि जी-हुजूरी की शपथ ग्रहण की थी। कहते हैं हम वाकई में कुछ ज्यादा खा रहे हैं। पर उस बदइन्तिज़मी के लिए एक शब्द तक नहीं, जिस रिपोर्ट में सामने आया है कि कुल पैदा अनाज का १० परसेंट तो चूहे और दूसरे कीडों के पेट में जाता है।
ऐसे महान कूटनीतिज्ञों के लिए मेरी और से श्रद्धांजलि का एक शब्द - जय हिंद।
apne पहले प्रयास में काशीराम चौधरी